Monday, December 21, 2015

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स्पर्श "
उसका घुटना काफी हद तक छिल गया था..खून रिस रहा था.. इधर उधर भी काफी खरोंच आ गयी थी...वो दर्द से कराह रहा था..लोगो से हमदर्दी की उम्मीद में इधर उधर देख रहा था..लोग बाग़ बिना देखे पास से निकल रहे थे..उसे सहानुभूति की कोई किरण दिकह्यी नहीं दी..
वो चौंक गया जा दो कोमल हाथ उसके घायल घुटने को सहलाने लगे.. अपने दुपट्टे के पल्लू से उसके घाव को पोंछा.. जब खून का रिसना बंद नहीं हुआ तो दुपट्टे का एक पल्लू फाड़कर उसके घुटने पर बांध दिया.. और उसे कंधे का सहारा देकर उठाया और कस कर सीने से लगा लिया...हाथों का सहारा देकर वो उसे लेकर घर की और बढ़ गयी..
एक स्पर्श दर्द को भी छूमंतर कर गया..

२. "सोच "
वो बेचारा अलसुबह से कोठी के गटर को बांस की खरपच्ची से साफ़ करने की कोशिश करता रहा.. जब सफलता हाथ न लगी तो उसने कोठी की मालकिन से कहा -"मेम साहबमेन होल में घुसना पड़ेगा.. यहाँ से तो बात नहीं बन रही.."
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ठीक है भैयाकैसे भी करके इसे साफ़ कर दो.. शाम से गटर बंद पड़ा है. टॉयलेट सीट से पानी और गंद नहीं निकल पा रहा.. आज सुबह से कोई फ्रेस भी नहीं हो पाया.."
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जी मेम साहब" -कहकर उसने अपने कपडे खोले और गटर में उतर गया.. तकरीबन डेढ़ -दो घंटे की मसक्कत के बाद उसे सफलता हाथ लगी.. वो फावड़े से मेन होल का गंद बाहर निकलता रहा.. जब वो साफ़ सफाई बाहर निकला तो उसने देखाउसकी कमीज पर भी गंद पड गया था..
उसने कोठी की मालकिन को कहा -"मेम साहबमेरी कमीज ख़राब हो गयी है अगर बाबूजी की कोई पुराणी कमीज मिल जाती तो मैं आराम से घर तक पहुँच जाता .. आप मेरे मेहनताने में से पैसे काट सकती हो.."
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देखती हूँ भैया " -कहकर वो अन्दर गयी और थोड़ी एर बाद एक टी-शर्ट लेकर बहार आई...
और उसे दे दी..
टी-शर्ट पहन और अपनी मजदूरी ले वो गहर की और जाने लगा...टी शर्ट पर लिखा था---if being sexy is a crime ,arrest me..
रास्ते में जो भी उसे देखता हँसने लगता. उसे समझ नहीं आया कि लोग क्यों हँस रहे हैं .. वो रास्ता तय करके घर तक पहुँच ही गया..
३.
वेडनेसडे 
सिर भारी भारी लग रहा था... पढने की कोशिश की लेकिन नहीं पढ़ पाया... लाइट ऑफ करके लेट गया.. रूम का दरवाजा खुला था...मायो ने दरवाजा खटखटाया.. मैंने उसे अन्दर आने को बोला...अन्दर आकर मायो ने पूछा-"सुदीप ट्यूब लाइट ऑफ क्यों है ?क्या हुआ?"
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कुछ नहीं,,सिर में दर्द है "-मैंने जबाब दिया..
ओह सिर में दर्द है ....सुदीप तुम बैठो मैं अभी ठीक करता हूँ...यीशु सब ठीक करेगा..."
मैं बैठ गया.... मायो ने मेरे हाथ अपने हाथ में लिए और बैठ गया. उसके होंठ बुदबुदा रहे थे... उसने कहा-" कैसा महसूस कर रहे हो ?"
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ठंडक है... "
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मैं जीसस से परार्थना किया.. वो सब ठीक करेगा...."--मायो न कहा... फिर उसने ट्यूब लाइट जला दी...
मायो बोला- विजय नगर में चर्च चला करो... प्रार्थना करेगा तो जीसस सब ठीक करेगा... वेडनेसडे को शाम में प्रेयर होता है तुम साथ चलेगा तो जीसस खुश होगा...तुम्हार दोस्त योगेश भी जाता था ..पहले वो दुखी रहता था अब सब ठीक है..उसने बप्तिसा भी ले लिया है "
मुझे बप्तिसा का अर्थ तब समझ नहीं आया..
वेडनेसडे को मायो फिर मेरे रूम में आया.. हम दोनों तैयार होकर चर्च गए.. चर्च में लोग अपना अनुभव सुनाते और कहते कि मैं दुखी था जीसस ने मेरी प्रेयर को सुना.. अब मैं अच्छा महसूस कर रहा हूँ.. ब्रोदर जॉय ने मुझसे कहा- सुदीप तुम भी अपना अनुभव शेयर करों ..मैं उनसे कहता अभी मैं सीख रहा हूँ.. मायो और मैं हर वेडनेसडे चर्च जाने लगे.. ब्रोदर जॉय ने मुझे बाइबल दी... मैंने बाइबल पढना शुरू किया.. मुझे जो अजीब या अच्छा लगता ...मैं उसे अंडर लाइन कर देता... एक दिन फिर चर्च में प्रेयर चल रही थी.. मेरे चेहरे पर अजीब से भाव थे.. ब्रोदर जॉय ने कहा --सुदीप कुछ कहना चाहते हो.. जीसस तुम्हारे साथ है बोलो क्या परेशानी है...मैं खड़ा हुआ और बोला -- ".बाइबल में पेज नंबर इतने पर लिखा है कि महिलाओं का परसिया (चर्च) में जाना मना है.. ऐसा क्यों ?"
ब्रोदर जॉय के चेहरे पर हवाइयां थी.. फिर वो थोडा संभले और बोले-- "चाय के समय बात करेंगे..."
प्रेयर ख़त्म हुई . तो बाहर आकर लोग चाय पीने लगे.. मायो ने मेरे हाथ में चाय का कप पकड़ा दिया ...ब्रोदर जॉय मेरे पास आये और बोले- सुदीप बिस्किट लो"
मैंने फिर उत्सुकतावश पूछा - वो... महिलाएं...."
वो बोले-"सुदीप तुम्हे ऐसे सवाल सबके सामने नहीं पूछने चाहिए.. तुमने देखा ना मेरे चर्च में महिलाएं हैं ना."
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फिर ये सब बाइबल में क्यों लिखा...क्या इसमें गलत लिखा?"
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नहीं गलत नहीं लिखा... तुम जानते हो ना महिलाएं कितनी बातूनी होती है... चर्च में आएँगी तो फिर प्रेयर में परेशानी होगी..."
फिर आपने इन्हें अनुमति देकर बाइबल का उलट व्यवहार क्यों किया है?"
ब्रोदर जॉय निरुत्तर थे...
अगले वेडनेसडे मायो का मैं इंतज़ार करता रहा.. शायद मेरा डोर वो खटखाटायेगा ...वो वेडनेसडे होस्टल में रहते नहीं आया...

४.
ऐलान
उसने बड़े जोश के साथ ये ऐलान किया था कि मैं बिना दहेज़ लिए शादी करके एक मिशाल कायम करूँगा..... पिता ने काफी समझाया कि बेटा मेरा समाज में मान सम्मान है..... हम खानदानी ठाकुर हैं...... तुम्हारे दादा जी की थाकुरियत ५० गांवों में चलती थी.... अब वो नहीं रहे तो ये जिम्मा मेरे ऊपर आ गया.... हमारे यहाँ दिन भर भण्डारा चलता रहता है....... बिना दहेज़ की शादी होगी तो सारे ठाकुर समाज में हमारी थू थू होगी....लोग हमारे बारे में बाते बनायेंगे....... सुदीप ने पिता की बाते सुनी तो भी उसका निर्णय नहीं बदला...... 
सुदीप के साथ काम करने वाली सजातीय कमला ने उसे नेहा से मिलवाया ...... नेहा के परिवार  में ६ लड़कियां थी और पिता निहायत ही गरीब..... सुदीप को लगा कि मेरे लिए मिशाल कायम करने और अपने मन मुताबिक शादी करने का इससे अच्छा रिश्ता नहीं मिल सकता...... उसने नेहा के पिता को शादी के लिए हाँ कर दी.... और अपनी मंशा से उन्हें अवगत करा दिया...... नेहा के पिता ने जब सुना कि बटेऊ बिना बारात और बिना दहेज़ के शादी करना चाहते हैं तो उन्हें लगा कि बिन मांगे मन्नत पूरी हो गयी...... 
सुदीप के घर वालों ने अनमने मन से उसका विवाह कर दिया ...... सुदीप ने वैवाहिक जीवन में भी अपनी पढाई को जरी रखा और वो अधिक अच्छे ओहदे के लिए प्रयास करता रहा..... उसकी पत्नी नेहा उसे पढने को मना करती और पूर्णरूप से घर परिवार ने रच बस जाने का दबाव डालती...... साथ ही रोज़ डिस्को ,,,रेस्तरो जाने की जिद्द करती...... सुदीप के मन में जैसे एक फ़ांस सी गड गयी......अब छोटी छोटी बातों पर विवाद होने लगे......उस दिन तो हद ही हो गयी..... सुदीप की तबियत खराब थी..... और नेहा ने खाना नहीं बनाया था..... सुदीप के कहने पर जबाब मिला आपकी तो रोज़ ही तबियत ख़राब रहती है...... मैं क्या सारा दिन चूल्हे में खटने के लिए हूँ.... ढाबे से खाना माँगा लो...मेरा आज खाना बनाने का बिलकुल मन नहीं है...... विवाद बढ़ गया तो नेहा ने अपना बैग सम्भाला और मायके चली गयी.....
हफ्ते बाद भी नेहा नहीं आई...... आया तो कोर्ट का नोटिस..... सुदीप ने नोटिस पढ़ा जिसमे उसके ऊपर दहेज़ उत्पीडन के चार्जेस लगे थे.... उसे याद आने लगा कि कैसे उसकी सादगीपूर्ण शादी को मिडिया में भी कवरेज मिला था...... आँखे आसुंओ से तर बतर थी और पिता का चेहरा आंसू की बूंदों में तैर रहा था.......


रचनाकार : संदीप तोमर 
पता :
संदीप तोमर 
डी-२ / १ 
जीवन पार्क , उत्तम नगर 
नई दिल्ली-११००५९ 
दूरभाष:
8377875009

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